साहित्यरथी लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ रचित "असम संगीत" का नया दृश्य-श्रव्य रूप लॉन्च
गुवाहाटी, 28 सितंबर:साहित्यरथी लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ की अमर रचना "असम संगीत" ("आमि असमीया नहउँ दुखिया") के नए दृश्य-श्रव्य रूप को आज ज्योति चित्रबन फिल्म कॉम्प्लेक्स के कलागुरु प्रेक्षागृह में भव्य रूप से लॉन्च किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और श्रद्धांजलि के साथ हुई। इसे लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ के परपोते अभिषेष बरठाकुर, ज्योति प्रसाद अग्रवाल की दूसरी पुत्री ज्ञानश्री अग्रवाल पाठक, डॉ. सूर्य हजारिका, मनीषा हजारिका और प्रसिद्ध संगीतकार-गायक रमेन चौधरी ने संयुक्त रूप से किया। साहित्यरथी लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सूर्य हजारिका और मृणालिनी देवी ने संयुक्त रूप से "असम संगीत" के इस दृश्य-श्रव्य संस्करण का अनावरण किया और इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। अनावरण से ठीक पहले विशिष्ट संगीतশিল্পী लक्ष्मीकांत बोरो ने बेजबरुआ रचित गीत गाकर सभा को संगीतमय और गंभीर बना दिया। कार्यक्रम के अंत में राज्य के राष्ट्रीय संगीत "ओ मोर अपनाोर देश" के सामूहिक गान के साथ इसका समापन हुआ।
प्रसिद्ध संगीतकार रमेन चौधरी ने इस यात्रा की सफलता की कामना करते हुए कहा कि असम संगीत की गूंज राज्य के कोने-कोने तक पहुँचे। वहीं, मंजुला हजारिका ने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को इस 48 पंक्तियों वाले पूर्ण गीत को समझना और अपनाना चाहिए।
समारोह में कई गणमान्य कलाकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों, एनजीओ तथा दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
उपस्थित जनता ने इस महान प्रयास के लिए 'सृष्टिरूपा' के सौजन्य से 'ओ मोर अपनाोर देश' संगठन के सदस्यों, इस गीत की प्रयोजक कल्पना राजकुमार और निर्देशक बंदना तालुकदार की सराहना की। साथ ही, कार्यक्रम के दौरान 'कस्तूरी मृग'नामक साक्षात्कार कार्यक्रम की झलकियाँ भी वृत्तचित्र के रूप में दिखाई गईं।



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