रीजनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर होम्योपैथी, द्वारा आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न।
मालीगांव,11 मार्च। “उत्तर-पूर्व भारत में उभरते रोग पैटर्न: श्वसन एवं मानसिक स्वास्थ्य पर होम्योपैथिक दृष्टिकोण” विषय पर दो दिवसीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का उद्घाटन सोमवार को गुवाहाटी के जी.एस. रोड स्थित होटल लिली में किया गया। इस संगोष्ठी का आयोजन रीजनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर होम्योपैथी, गुवाहाटी द्वारा केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत किया गया।
उद्घाटन सत्र में डॉ. इन्द्रनोशी दास, एसीएस, निदेशक आयुष, असम सरकार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। अपने संबोधन में उन्होंने उत्तर-पूर्व क्षेत्र में उभरते रोग पैटर्न को समझने की बढ़ती आवश्यकता पर जोर दिया और असम में जनस्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में होम्योपैथी की संभावित भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि असम में वर्तमान में लगभग 500 आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं, जो समुदाय को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
मंच पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में प्रोफेसर (डॉ.) अभिजीत चट्टोपाध्याय, पूर्व निदेशक एवं पूर्व प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष, मैटेरिया मेडिका विभाग, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी, कोलकाता, तथा डॉ. दीपेन बरुआ, उपनिदेशक आयुष-सह-पंजीयक, बोर्ड ऑफ होम्योपैथिक सिस्टम ऑफ मेडिसिन, असम शामिल थे।
कार्यक्रम की शुरुआत में अनुसंधान अधिकारी (होम्योपैथी)वैज्ञानिक डॉ अमूल्य रत्न साहू, प्रभारी अधिकारी, आरआरआई(एच), गुवाहाटी ने उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने होम्योपैथिक अभ्यास और अनुसंधान को सुदृढ़ करने में वैज्ञानिक संवाद और सामूहिक अधिगम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस संगोष्ठी में असम के विभिन्न हिस्सों से लगभग 250 पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए हैं, जिससे यह क्षेत्र के होम्योपैथिक चिकित्सकों की सबसे बड़ी वैज्ञानिक सभाओं में से एक बन गई है।
यह संगोष्ठी उत्तर-पूर्व भारत में बदलते रोग पैटर्न, विशेषकर श्वसन रोगों और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बढ़ते प्रभाव पर केंद्रित है और शोध, क्लिनिकल अनुभव तथा शैक्षणिक आदान-प्रदान के माध्यम से इनके प्रबंधन में होम्योपैथी की भूमिका पर चर्चा करती है।
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान प्रोफेसर (डॉ.) अभिजीत चट्टोपाध्याय, प्रोफेसर (डॉ.) सुभाष सिंह, डॉ. चिंतामणि नायक, डॉ. हादी कमरुल इस्लाम, डॉ. हृषिकेश शर्मा, डॉ. सौमेंदु भट्टाचार्य और डॉ. दीपेन बरुआ सहित कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी में वैज्ञानिक व्याख्यान, संवादात्मक सत्र तथा प्रतिभागियों के लिए एक क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चाओं से उत्तर-पूर्व क्षेत्र में वर्तमान रोग प्रवृत्तियों और श्वसन तथा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के होम्योपैथिक प्रबंधन की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
यह संगोष्ठी मंगलवार को समापन सत्र के साथ समाप्त हुई, जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार वितरित किए गए।




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