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असम में दिखा दुर्लभ प्रजाति का उल्लू, वन्यजीव संरक्षण की दिशा में नई उम्मीद,


 

तिनसुकिया,15 जुलाई: असम के तिनसुकिया में दुर्लभ प्रजाति का 'ऑस्ट्रेलियाई ग्रास आउल' (Australian Grass Owl) देखा गया है।  शनिवार को दिल्ली से आए पर्यटकों के एक समूह ने इस उल्लू को देखा। यह दुर्लभ उल्लू तिनसुकिया के प्रसिद्ध मागुरी मोटापुंग बील (झील) में दिखाई दिया है। खबर फैलते ही वन्यजीव विशेषज्ञ और पक्षी प्रेमी इस क्षेत्र पर पैनी नजर रख रहे हैं।

​विशेषज्ञों के एक वर्ग के अनुसार, यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पूर्वोत्तर भारत जैव विविधता  के प्रमुख केंद्रों में से एक है। आमतौर पर इस दुर्लभ प्रजाति का उल्लू आसानी से दिखाई नहीं देता है। स्थानीय पर्यावरणविदों का कहना है कि इस प्रजाति के उल्लू इंसानी आबादी और नजरों से दूर रहना पसंद करते हैं। ये मुख्य रूप से घने घास के मैदानों में रहते हैं, जिसके कारण इन्हें ढूंढना बेहद मुश्किल होता है। हालांकि, हाल ही में मागुरी मोटापुंग बील में इस उल्लू के दिखने को विशेषज्ञ वन्यजीव अवलोकन के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर मान रहे हैं।

​मागुरी मोटापुंग बील की खासियत:

मागुरी मोटापुंग वर्तमान में भारत के सबसे लोकप्रिय पक्षी विहारों  में से एक है। देश भर से कई पक्षी प्रेमी, विशेषज्ञ, वन्यजीव फोटोग्राफर और पर्यटक यहां आते हैं। यहां की आर्द्रभूमि, जलाशय और घास के मैदान सैकड़ों स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का प्राकृतिक आवास हैं। पक्षी संरक्षण के लिए यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण है।

​वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस दुर्लभ प्रजाति के उल्लू की मौजूदगी यह साबित करती है कि इस आर्द्रभूमि का पारिस्थितिक महत्व कितना अधिक है।  पर्यावरणविदों का मानना है कि इस दुर्लभ वन्यजीव के मिलने से पर्यटन स्थल के रूप में मागुरी मोटापुंग बील की लोकप्रियता और बढ़ेगी, जिससे इस क्षेत्र में और अधिक शोध तथा निगरानी करना संभव हो सकेगा।

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