पूरे राज्य में धूमधाम से मनाया गया विश्वकर्मा पूजा।
गुवाहाटी,17।सितंबर: आज विश्व के रचयिता भगवान विश्वकर्मा की पूजा है। वेदों में विश्वकर्मा को जगत का सृष्टिकर्ता बताया गया है। भाद्र महीने की संक्रांति के दिन आयोजित होने वाली विश्वकर्मा पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख धार्मिक त्योहार है।
राज्य के कोने-कोने में विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया गया है। हर संगठन, संस्थान, कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान में विश्वकर्मा पूजा धूमधाम से मनाया गया हैं।
'विश्वकर्मा' नाम का अर्थ है— ब्रह्मांड का स्थापत्यकार । विश्वकर्मा ने अपनी सृजनात्मक शक्ति के बल पर ही पूरे विश्व को थाम रखा है।
दूसरी ओर, विश्वकर्मा के 108 विभिन्न नाम हैं। रामायण में वर्णित वैभवशाली और समृद्ध नगरी 'लंका' के रचयिता भी विश्वकर्मा को ही कहा जाता है। वे उपवेद, अर्थवेद और चतुःशास्त्रिकाल के रचयिता हैं। वे देवपुरी, देवशिल्प आदि के निर्माता भी हैं।
भगवान विश्वकर्मा को दैवीय वास्तुकार, इंजीनियर और संसार का सृष्टिकर्ता कहा जाता है। उन्हें दुनिया का पहला इंजीनियर भी माना जाता है। प्राचीन काल से ही शिल्पकार विश्वकर्मा का एक विशिष्ट स्थान रहा है, क्योंकि ऐसा विश्वास है कि वे केवल मर्त्यलोक के ही नहीं, बल्कि देवताओं के भी शिल्पकार हैं।



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