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गुवाहाटी में मानसून की दस्तक के साथ भूस्खलन का मंडराया खतरा: प्रशासन ने 366 क्षेत्रों को किया चिह्नित

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​गुवाहाटी, 2 सितंबर: पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार और असम की राजधानी गुवाहाटी में मानसून के आगमन के साथ ही प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर भूस्खलन  का खतरा एक बार फिर गंभीर रूप लेता जा रहा है। जिला प्रशासन ने सुरक्षात्मक उपायों के तहत शहर भर में कुल 366 क्षेत्रों को भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील और अतिसंवेदनशील  के रूप में चिह्नित किया है। इन इलाकों में रहने वाली आबादी पर भारी बारिश के दौरान हर साल आपदा का साया मंडराता रहता है।

​प्रशासन द्वारा जारी की गई विस्तृत सूची के अनुसार, पहाड़ियों और ढलानों पर बसे विभिन्न इलाकों में खतरे की गंभीरता अलग-अलग स्तर की है। इसमें अकेले चुनचाली क्षेत्र के 77 इलाकों को 'अत्यधिक खतरनाक'  श्रेणी में रखा गया है, जो प्रशासन और स्थानीय नागरिकों दोनों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।


​प्रशासनिक रूप से चिह्नित भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पूरी सूची:

​चुनचाली — 77 क्षेत्र (अत्यधिक खतरनाक)

​नूनमती — 40 क्षेत्र

​खारघुली — 37 क्षेत्र

​खानापारा — 33 क्षेत्र

​नारेंगी — 31 क्षेत्र

​हेंगराबारी — 30 क्षेत्र

​काहिलिपारा — 25 क्षेत्र

​शांतिपुर — 20 क्षेत्र

​नरकासुर पहाड़ी — 14 क्षेत्र

​गड़भांगा — 9 क्षेत्र

​मालीगांव — 8 क्षेत्र

​कालापहाड़ — 7 क्षेत्र

​गोटानगर और नवग्रह — 6- क्षेत्र

​कोइनाधरा, कामाख्या, फोटाशिल और सरणिया — 5-क्षेत्र

​लंकेश्वर — 2 क्षेत्र

​शुक्रेश्वर — 1 क्षेत्र

​प्रशासन द्वारा इन संवेदनशील इलाकों की सूची सार्वजनिक किए जाने के बाद से ही वहाँ निवास करने वाले परिवारों में गहरी चिंता और डर का माहौल है। अनियोजित निर्माण कार्यों, पहाड़ियों की अनियंत्रित कटाई और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण इन क्षेत्रों की मिट्टी लगातार कमजोर होती जा रही है, जिससे भारी बारिश के वक्त भूस्खलन की घटनाएं आम हो जाती हैं।


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