हिमालयी वनस्पति जगत से बड़ी खबर: 158 साल बाद भारत में दोबारा दिखा दुर्लभ पौधा 'सायनैंथस हुकरी'
ईटानगर 11 जुलाई: भारत के वानस्पतिक इतिहास में एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में एक अत्यंत दुर्लभ हिमालयी फूल वाले पौधे, सायनैंथस हुकरी (Cyananthus hookeri), को पूरे 158 वर्षों के बाद फिर से खोजा गया है। साल 1867 में सिक्किम में आखिरी बार देखे जाने के बाद, भारत में इस प्रजाति की यह पहली प्रमाणित साइटिंग है।
चूना घाटी में हुई ऐतिहासिक खोज 'बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया' (BSI) के वैज्ञानिकों ने इस दुर्लभ पौधे को तवांग के मागो गांव के पास स्थित चूना घाटी में खोज निकाला है। यह खोज लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर की गई। वैज्ञानिकों की इस महत्वपूर्ण खोज को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण पत्रिका 'ओरिक्स' में भी प्रकाशित किया गया है।
कैंपानुलेसी (बेलफ्लावर) परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस बैंगनी-नीले रंग के फूल को भारत में आखिरी बार 1867 में ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री जोसेफ डाल्टन हुकर ने दर्ज किया था। अरुणाचल प्रदेश में इस प्रजाति की मौजूदगी का यह अब तक का पहला आधिकारिक रिकॉर्ड है।
'एंडेंजर्ड' घोषित करने की सिफारिश BSI के वैज्ञानिकों (सुभजीत लाहिड़ी, मोनालिसा दास और सुधांशु शेखर दाश) ने यह सर्वेक्षण सितंबर 2025 में किया था।
वैज्ञानिकों के अनुसार "अल्पाइन घास के मैदानों और पथरीले ढलानों पर इस पौधे के 50 से भी कम परिपक्व पौधे बचे हैं, जो इसकी अत्यधिक दुर्लभता और सीमित फैलाव को दर्शाता है।"
'इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर' के मानदंडों के तहत सायनैंथस हुकरी को भारत में 'लुप्तप्राय' श्रेणी में वर्गीकृत किया जाए। हालांकि यह पौधा भूटान, नेपाल और चीन के कुछ हिस्सों में भी पाया जाता है, लेकिन भारत में यह बेहद दुर्लभ है।
जैव विविधता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने इस खोज का स्वागत करते हुए इसे भारत की वानस्पतिक विरासत के लिए एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि इस पुनर्खोज से राज्य की असाधारण जैव विविधता की पुष्टि होती है और इसके नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने की आवश्यकता और मजबूत होती है।
वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा, अरुणाचल प्रदेश हजारों पौधों की प्रजातियों का घर है, जिनमें से कई स्थानिक (endemic) या अत्यंत दुर्लभ हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस हालिया खोज से जैव विविधता संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए राज्य का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

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