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पांडु कामाख्या नगर में ‘ऐक्यतान’ के तत्वावधान में वसंत उत्सव का आयोजन



गुवाहाटी, 4 मार्च: होली या रंगों का त्योहार भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतों में अत्यंत हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर भाईचारे और सौहार्द का संदेश देते हैं। वसंत ऋतु के आगमन का संदेश लेकर आने वाला यह उत्सव विशेष महत्व रखता है। पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर को स्मरण करते हुए नृत्य, संगीत, कविता और रंगों की छटा के साथ वसंत उत्सव मनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों के बंगाली समुदाय होली के दिन को वसंत उत्सव के रूप में मनाते हैं।

  


इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए पांडु कामाख्या नगर में ‘ऐक्यतान’ के संचालन में कामाख्या नगर के दुर्गा मंडप प्रांगण में  बुधवार दिनभर वसंत उत्सव का आयोजन किया गया। सुबह से ही पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला। प्रथम चरण में क्षेत्र के पुरुषों और महिलाओं ने एक-दूसरे को विभिन्न रंगों से सराबोर कर गीतों की धुन पर प्रभात फेरी निकाली। यह प्रभात फेरी कामाख्या नगर के दुर्गा मंडप से प्रारंभ होकर पांडु के आसपास के कुछ क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए पुनः दुर्गा मंडप प्रांगण में आकर समाप्त हुई।



 दूसरे चरण में मंडप प्रांगण में पुरुष, महिलाएं और बच्चे एकत्रित होकर श्रीकृष्ण लीला के स्मरण में नृत्य, संगीत और कविता का प्रदर्शन किया। रंग, सुर और ताल के समन्वय ने पूरे दिन को आनंदमय बना दिया। उल्लेखनीय है कि क्षेत्र के कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने भी अपने बचपन की यादों को ताजा करते हुए रंगोत्सव में भाग लिया। कुल मिलाकर कामाख्या नगर का यह वसंत उत्सव सौहार्द, एकता और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण एक यादगार दिन बन गया।



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