मालिगांव, 13 जुलाई: लगातार कई दिनों से हो रही बारिश के कारण गुवाहाटी के पांडु, मालिगांव समेत कई इलाके कृत्रिम जलभराव की चपेट में हैं। इनमें सबसे अधिक परेशानी का सामना कामाख्या नगर के निवासियों को करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह समस्या प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि रेलवे की लापरवाही और अव्यवस्थित जल निकासी व्यवस्था के कारण हर वर्ष बरसात के दौरान उत्पन्न होती है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हल्की बारिश होते ही मालिगांव के समीप स्थित नीलाचल पहाड़ी से आने वाला वर्षा जल नालियों से होकर सड़कों पर फैल जाता है। यह पानी बरिपाड़ा होते हुए कामाख्या नगर में जमा हो जाता है, जिससे लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है। बरिपाड़ा क्षेत्र में अतिरिक्त पानी निकालने के लिए समय-समय पर सरकार की ओर से पंपों का उपयोग किया जाता है, लेकिन कामाख्या नगर और बरिपाड़ा के सामान्य जल निकासी का मुख्य मार्ग कामाख्या रेलवे स्टेशन के पास स्थित नाला है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कामाख्या रेलवे स्टेशन के रेलवे कोच मेंटेनेंस विभाग में कार्यरत ठेका श्रमिक नियमित रूप से विभिन्न गैर-जैव अपघटनीय (नॉन-बायोडिग्रेडेबल) कचरे को इसी नाले में फेंक देते हैं। इससे नाले का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो जाता है और पानी निकलने का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। लोगों का दावा है कि इसी वजह से थोड़ी-सी बारिश में भी कामाख्या नगर में कृत्रिम जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
पीड़ित निवासियों का कहना है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने कई बार स्थानीय पार्षद से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। उनका मानना है कि रेलवे के कोच मेंटेनेंस विभाग द्वारा नाले में अवैध रूप से कचरा फेंके जाने के मामले में असम राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा गुवाहाटी नगर निगम (जीएमसी) को सख्त हस्तक्षेप करना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब रेलवे विभाग और जीएमसी संयुक्त रूप से एक सुव्यवस्थित ड्रेनेज प्रणाली विकसित करें। ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे वर्षा का पानी प्राकृतिक रूप से और तेजी से बाहर निकल सके। इसके साथ ही, खुले नालों को योजनाबद्ध तरीके से ढके हुए (कवर) ड्रेनों में परिवर्तित करने की भी मांग की गई है। उनका कहना है कि खुले नालों में बार-बार कचरा जमा होने से जल प्रवाह बाधित होता है और कृत्रिम जलभराव की समस्या दोबारा उत्पन्न हो जाती है। इसलिए कामाख्या नगर के निवासियों ने संबंधित विभागों से शीघ्र आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।



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