Friday, May 15, 2026

दीपोर बील में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण को लेकर विवाद, वन हाथियों की सुरक्षा के दावे के साथ रेलवे का बड़ा कदम

File Photo
 

गुवाहाटी, 15 मई: असम के अन्यतम महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि दीपोर बील क्षेत्र में निर्माणाधीन एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर तीव्र विवाद उत्पन्न हो गया है। कॉरिडोर निर्माण के लिए कई पुराने और नए पेड़ों को काटे जाने की घटना से पर्यावरण प्रेमियों तथा आम लोगों के बीच व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। हालांकि, उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे ने इस परियोजना को वन हाथियों की सुरक्षा तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

इस संदर्भ में उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा कि वन हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का निर्णय लिया गया है। रेलवे विभाग का दावा है कि कई वर्षों से दीपोर बील से सटे क्षेत्रों में रेलवे लाइन के कारण हाथियों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हो रही थी तथा दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ रही थी। इसी कारण दीर्घकालिक समाधान के रूप में इस परियोजना को शुरू किया गया है।

उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे की पहल पर निर्मित होने वाली इस कॉरिडोर परियोजना को वन विभाग तथा वाइल्डलाइफ इंस्टीटूट ऑफ इंडिया  के सहयोग से कार्यान्वित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस पूरी परियोजना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण से मंजूरी प्राप्त हो चुकी है।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, लगभग 4.7 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए कुल 42 पेड़ों को काटा गया है। हालांकि, इसके बदले 880 नए पेड़ लगाने की योजना बनाई गई है। पेड़ों की कटाई और वृक्षारोपण की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है तथा इसका पूरा खर्च रेलवे विभाग वहन करेगा।

करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस एलिवेटेड कॉरिडोर का कार्य अगले ढाई वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे ने निर्धारित किया है। वहीं, पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है।

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